
पूर्व मुख्य सचिव बी.के.एस. रे का निधन, प्रशासन और साहित्य जगत ने खोया एक बहुमुखी व्यक्तित्व
रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बी.के.एस. रे का निधन हो गया। उनके निधन से प्रशासनिक, साहित्यिक और बौद्धिक जगत में शोक की लहर फैल गई है। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को याद किया है।
बी.के.एस. रे भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते थे। अपने लंबे प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए शासन-प्रशासन को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाई। उनकी पहचान एक कुशल प्रशासक, चिंतक और संवेदनशील लेखक के रूप में रही।
प्रशासन से साहित्य तक का उल्लेखनीय सफर
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने साहित्य और लेखन को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बनाया। प्रशासनिक अनुभवों, सामाजिक सरोकारों और समकालीन विषयों को उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से अभिव्यक्त किया। उनकी लेखनी में समाज, व्यवस्था और मानवीय मूल्यों की गहरी समझ दिखाई देती थी।
उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन में अनेक उपन्यास, कविता संग्रह, नाटक और विचारपरक पुस्तकें लिखीं। उनकी रचनाएं पाठकों और साहित्य प्रेमियों के बीच विशेष रूप से सराही गईं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान
साहित्य और चिंतन के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें विदेशों में भी सम्मानित किया गया था। साहित्यिक मंचों पर वे एक गंभीर लेखक और विचारक के रूप में प्रतिष्ठित थे।
बहुआयामी व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि
बी.के.एस. रे के निधन पर प्रशासनिक अधिकारियों, साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों के लोगों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि उन्होंने प्रशासनिक सेवा और साहित्य, दोनों क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी है।
उनका जीवन नई पीढ़ी के अधिकारियों और लेखकों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
फिलहाल, उनके निधन से छत्तीसगढ़ ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने प्रशासनिक दक्षता और साहित्यिक सृजनशीलता के माध्यम से समाज को समृद्ध करने का कार्य किया।


